Chandrayaan-3 vs Luna 25: चंद्रयान 3 के बाद लांच हुआ लूना 25 चांद पर पहले पहुंचेगा

Chandrayaan-3 vs Luna 25: चंद्रयान 3 के बाद लांच हुआ लूना 25 चांद पर पहले पहुंचेगा

रूस ने शुक्रवार को अपना मून मिशन लोनाटो 5 लॉन्च कर दिया है लूना 25 मिशन 11 अगस्त को सुबह 4:00 बजे लांच किया गया पहले इसके 23 अगस्त के चांद की सतह को छूने की उम्मीद थी लेकिन अब इसके 21 अगस्त को वहां पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है

पिछले 47 साल में चांद पर अंतरिक्ष यान भेजने की रूस की यह पहली कोशिश है रूस ने 1976 में अपना पहला मून मिशन लांच किया था शुक्रवार को लांच किए गए मिशन के तहत अंतरिक्ष यान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा माना जा रहा है यहां पानी हो सकता है इससे पहले 14 जुलाई को भारत ने chandrayaan-3 लांच किया chandrayaan-3 भी चांद की सतह पर उतरेगा

रूस की इस अभियान की होर चीन और अमेरिका से भी है ,अमेरिका और चीन ने चांद की दक्षिणी ध्रुव पर तकनीकी यान उतारने की एडवांस मिशन शुरू की है रूस की स्पेस एजेंसी रोस्कॉसमॉस के मुताबिक 

लूना 25 को सोयूज 2.1 रॉकेट से लॉन्च किया गया, यह रॉकेट 46.3 मीटर लंबा है, इसका वजन 313 टन है वही लूना 25 में रोवर और लैंडर है इसके लैंडर का वजन 800 किलो है, लूना 25 पहले सॉफ्ट लैंडिंग की प्रैक्टिस करेगा इसके बाद यह चांद की मिट्टी के नमूने लेने और उनका विश्लेषण करने का काम करेगा लोना 25 का आकार छोटी कार के बराबर है चांद के दक्षिण दूर पर यह 1 साल तक काम करेगा

Chandrayaan-3 vs Luna 25: चंद्रयान 3 के बाद लांच हुआ लूना 25 चांद पर पहले पहुंचेगा

रूस के मून मिशन के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं रूस का कहना है कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाकर उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम को निशाना बनाने की कोशिश की लेकिन पश्चिमी देशों के प्रतिबंध रूसी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने में नाकाम रहे हैं अगर उनका मून मिशन सफल रहता है तो यह उसकी एक बड़ी उपलब्धि होगी यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों की स्पेस एजेंसी रूस की एजेंसी का आपसी सहयोग खत्म हो चुका है

रूस के स्पेसशिप चीफ यूरीबोरोसियों  ने बताया कि लूना 25 इसी  इसी महीने 21 अगस्त को चांद की सत्ता को छू सकता है बल्कि भारत द्वारा लांच किया गया chandrayaan-3 ,23 अगस्त को चांद की सतह पर उतरेगा ऐसे में सवाल यह है आखिर लगभग एक महीने बाद भी लॉन्च हो कर  लूना chandrayaan-3 से पहले चांद की सतह छूने में कैसे कामयाब रहे इसकी वजह है कीकि चंद्रयान 3 * 25 की chandrayaan-3 लूना 25 की तुलना में अधिक दूरी तय कर रही है दरअसल chandrayaan-3 अपनी सफर के दौरान चंद्रमा और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का लाभ लेना चाहता है, जिससे इंधन का बहुत कम खर्चा होगा

इस सवाल पर विज्ञान पत्रकार पल्लव  बागला बताते हैं “यह रॉकेट के ताकतवर होने का मामला है रूसी रॉकेट ज्यादा बढ़ा है हमारा रोके छोटा है लिहाजा हमारा रॉकेट chandrayaan-3 को इतना बैग (वेलोसिटी) नहीं दे सकता है कि यह ज्यादा रफ्तार से चांद की ओर जा सके इसके साथी पल्लव बागला यह भी बताते हैं ताकतवर और बड़ा रॉकेट ज्यादा खर्चीला होता है इसलिए भारत ने छोटा रॉकेट के लिए जरिए अपना मकसद साधने का प्लान बनाया लेकिन बड़ी बात यह है कि भारत ने मौका नहीं गंवाया |

 

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