Elephant Human conflict :इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते टकराव का कारण क्या है

Elephant Human conflict :इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते टकराव का कारण क्या है

हाथी और इंसान के बीच टकराव की वजह से सबसे अधिक इंसानों की मौत का आंकड़ा भारत से है वह दूसरा नंबर श्रीलंका से है वही हाथियों की मौत के मामले मैं श्रीलंका पहले स्थान पर है और भारत दूसरे स्थान पर श्रीलंका में साल 2022 में फोटो 439 हाथियों की मौत हुई वहीं इसी साल हाथियों के मामले में 148 इंसानों की मौत रिकॉर्ड की गई हर साल जितने हाथियों की मौत होती है उनमें सबसे अधिक मौत मौतें गोली लगने से होती है

लोकल लोगों का क्या कहना है

“सभी आदमी हाथी के बाड़े की रखवाली के लिए यह रात भर पहरा देते हैं ,घर में केवल औरतें ही रह जाते हैं शाम होते ही हम रात का खाना खा लेते हैं और पेड़ों के चल चढ़कर बैठ जाना पड़ता है ,हाथियों के वजह से ही मैं अपनी मां और पिता के साथ पेड़ पर चढ़कर रहती हूं”  श्रीलंका में हाथियों से जुड़ी 70 फ़ीसदी रेंज इंसानों से जुड़ी हुई रहती है हाथियों के सिर्फ 30 फ़ीसदी रेंज ही प्रोटेक्टेड एरिया के तहत है ,और वहां इंसानों का दखल नहीं है यह बहुत ही यूनिक सिचुएशन है 4 सालों से हाथियों का प्रबंधन और इंसानों के बीच टकराव को देखने की कोशिश रही है  कि हाथियों को रिजर्व एरिया तक ही रख सके, इसके परिणाम स्वरूप ज्यादातर प्रोटेक्टेड एरिया के चारों ओर तार से गिरा कर दिए गए हैं इन इलेक्ट्रिक वायर के 90 फ़ीसदी  हाथी दोनों और है |

समस्या क्या है

स्थिति को ध्यान में रखते हुए और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर साल 2020 में एक नई योजना तैयार की गई है श्रीलंका में 5 वर्षों से अपनाई गई पद्धति की तुलना में मुख्य अंतर यह है कि बिजली की बाढ़ आरक्षित क्षेत्र की सीमा पर नहीं बल्कि पारिस्थितिक तंत्र की सीमा पर बनाई जानी चाहिए इसे हाथियों को अनुकूल वातावरण और और डेवलपमेंट प्लान को अलग करने का उद्देश्य होना चाहिए, हर साल जितने हाथियों की मौत होती है उनमें सबसे अधिक महोदय गोली लगने से होती है वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन डिपार्टमेंट मुख्य पशु चिकित्सक ने बताया कि “गोलियों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कोई हाथियों की जान जा चुकी है अंधे हो गए हैं

राजनीति

कई तरह की टेक्निक स्टेटजी है जिससे हाथियों के इंसानों के बीच जाने से रोका जा सकता है साथ ही हम दूसरी ओर इसके लिए कई कदम उठा रहे हैं ताकि इस तरह के टकराव को रोका जा सके ,’हम जो योजनाएं लेकर आते हैं हमें उन्हें कुछ समय देने की जरूरत है यहां यहां श्रीलंका में जो एक समस्या है भले ही हमारे पास प्लान है लेकिन हमें उनमें से कुछ ही प्लेन को चुनना पड़ता है ,और उन्हें को है लागू करना पड़ता है और फिर कह देते हैं कि योजना सफल ही नहीं हुई|

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