India UAE relation: भारत ने यूएई से भारतीय मुद्रा में ख़रीदा तेल

India UAE relation: भारत ने यूएई से भारतीय मुद्रा में ख़रीदा तेल

भारत और संयुक्त अरब अमीरात अमेरिकी डॉलर के बदले आपसी मुद्रा में दीपक्षी कारोबार शुरू कर दी है, भारत सरकार ने बताया है कि भारत की तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने यूएई की आबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से 1000000 बैरल तेल भारतीय रुपए में खरीदा है अब तक तेल का यह कारोबार अमेरिका डॉलर में होता था जुलाई में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की थी और दोनों देशों ने अपने-अपने मुद्रा में कारोबार करने का समझौता क्या था यही नहीं भारत और यूएई ने अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई इंस्टेंट पेमेंट प्लेटफार्म की लिंकिंग को भी मंजूरी दे दी है थी भारत और  यूएई के बीच साल 2022 में सीआरपी यानी कॉन्फ्रेंसेस इकोनामिक पार्टनरशिप समझौता हुआ था जो दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है एक दशक के दौरान भारत का किसी देश के साथ मुक्त व्यापार समझौता है|

India UAE relation: भारत ने यूएई से भारतीय मुद्रा में ख़रीदा तेल

इससे पहले साल 2011 में भारत में जापान के साथ ऐसा ही विपक्षी समझौता क्या था अमेरिका और चीन के बाद भारत सर्वाधिक कारोबार यूएई के साथ ही करता है भारत अमेरिका के बाद सबसे अधिक निर्यात भी यूएई यूएई कोई करता है इस समझौता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत और यूएई के बीच सालाना कारोबार पचासी अरब डॉलर से बढ़कर $100 तक पहुंच जाएगा|

यूएई अब भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है साल 2020-21  मैं यूएई का भारत में निवेश 1.03 डॉलर कथा जो इस समय बढ़कर 3 अरब डॉलर से सेब भी ज्यादा हो गया है निवेशक मानते हैं कि भारत का सामान का यूएई में प्रभाव बढ़ रहा है इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर के फेलो फिजूल रहमान सिद्धकी कहते हैं रुपए और  दिरहम में कारोबार शुरू होना दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते का प्रतीक है खाड़ी के देशों के पास बहुत पैसे है भारत पैसे को अपनी तरफ आकर्षित कर सकता है भारत ने रक्षा क्षेत्र में भी साझा उत्पन्न की है आज के समय में यूएई को भारत के कारोबार में एक गेटवे की तरह समझा जा रहा है  जैसे भारत पाकिस्तान को कारोबार $50अरब का दुबई के रास्ते करता है |

India UAE relation: भारत ने यूएई से भारतीय मुद्रा में ख़रीदा तेल

भारत और यूएई के $20 के बजाए रुपये और दिर्हाम दिरहम में कारोबार शुरू होने को वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर की बादशाह हाथ पर चोट की भी माना जा रहा है फिजूल रहमान सिद्दीकी कहते हैं कि डी डॉलर इलेक्शन की एक लहर सी चल रही है चीन भी यह कोशिश कर रहा है इससे पहले लीबिया के शासक कर्नल गद्दाफी ने गैर डॉलर मुद्राओं में तेल बेचने की कोशिश की थी अब भारत समेत कोई अन्य देश यह प्रयास कर रहे हैं चीन भी यूएई के साथ अपने मुद्रा में कारोबार कर रहा है चीन ईरान के साथ भी ऐसे कर रहा है|

नरेंद्र तनेजा(ऊर्जा विशेषज्ञ) कहते हैं कि यह मान लेना डॉलर का विकल्प बन जाएगा यह जल्दबाजी होगी वह कहते हैं भारतीय रुपए को एक मजबूत मुद्रा माना जा रहा है भले ही वह अभी डॉलर जितनी मजबूत ना हो ऐसे में भारतीय रुपया का अंतर्राष्ट्रीय करण हो रहा है लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता की दुनिया का तेल और गैस का कारोबार रुपया में या  में दिरहम में होने लगेगा भारत और संयुक्त राष्ट्र अमीरात के बीच रुपए में कारोबार का एक असर यह हो सकता है कि अन्य देशों में भी रुपए की स्वीकृत  बड़े तनेजा कहते हैं कि भारत और यूएकी बीच यूएई के बीच अगर रुपए में कारोबार बड़ा अन्य देशों को भी यह अधिक स्वीकार होगा और इससे वैश्विक स्तर पर रुपया मजबूत होगा|

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top